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Madhya Pradesh
Friday, April 17, 2026

संस्कृत विषय से सिविल सेवा योगी सरकार की अनोखी पहल

Malwanchal Times

निःशुल्क शिक्षा और छात्रवृत्ति से मिलेगी अभ्यर्थियों को सफलता

लगभग 18 राज्यों के छात्र ले रहे हैं उत्तर प्रदेश की योजना का लाभ

69 छात्र अब तक सफल, बढ़ रही संस्कृत की लोकप्रियता

लखनऊ-

उत्तर प्रदेश भाषा विभाग के अधीन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा सिविल सेवा परीक्षा योजना की प्रवेश परीक्षा रविवार को बाबूगंज स्थित रामाधीन इंटर कॉलेज में सम्पन्न हुई। इस परीक्षा में लगभग 450 अभ्यर्थी शामिल हुए, जबकि 850 से अधिक छात्रों ने आवेदन किया था। योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उन छात्रों को मिलता है जो सिविल सेवा परीक्षा में संस्कृत साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में चुनते हैं। उन्हें निःशुल्क शिक्षा, अध्ययन सामग्री के साथ तीन हजार रुपये मासिक छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है। छात्रों का चयन प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर किया जाता है तथा इस योजना की कक्षाएँ हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों माध्यमों में संचालित होती हैं। ऑनलाइन क्लास और टेस्ट सीरीज की सुविधा भी छात्रों को प्रदान की जाती है।
2019 से संचालित इस योजना के अंतर्गत अब तक छह सत्र पूरे हो चुके हैं और सातवें सत्र के लिए यह परीक्षा आयोजित की गई। योजना के संयोजक डॉ. शीलवन्त सिंह ने जानकारी दी कि अब तक इस योजना से लाभान्वित होकर 4 छात्र आईएएस, 22 छात्र पीसीएस और 43 छात्र विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में चयनित हो चुके हैं। कुल मिलाकर 69 छात्र इस योजना के माध्यम से सफल हुए हैं। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दिनेश मिश्र ने बताया कि पिछले छह वर्षों में संस्कृत विषय को लेकर सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और आज न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देश के लगभग 18 राज्यों के छात्र इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
आज सम्पन्न हुई परीक्षा में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु से भी अभ्यर्थी शामिल हुए। विशेष रूप से दक्षिण भारत से छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह योजना संस्कृत विषय से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए निःशुल्क रूप से संचालित की जा रही है और प्रारंभिक परीक्षा से लेकर साक्षात्कार तक समग्र तैयारी कराई जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि योगी सरकार की यह पहल न केवल प्रदेश बल्कि देश भर में संस्कृत विषय को लेकर सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच नई उम्मीद और आकर्षण पैदा कर रही है।


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