सागर/निहिल मिश्रा
प्रदेश के मुखिया आंगनबाडिय़ों के कायाकल्प के लिये हाथठेला लेकर राजधानी की सडक़ों पर निकलते हैं लोगों से जनभागीदारी के चलते आंगनबाडिय़ों को गोद लेकर उन्नयन की बात की जाती है, ताकि आंगनबाड़ी भवन सर्वसुविधा युक्त और
चाइल्ड फ्रेंडली बन सके लेकिन इन सब कवायदों के बाबजूद भी महिला बाल विकास विभाग और बिजली विभाग के बीच में फंसकर जिले की ग्रामीण परियोजना के अंतर्गत आने वाले करीब 500 आंगनबाड़ी केन्द्र विद्युत विहीन बने हुए हैं। महिला बाल विकास विभाग के द्वारा करीब 5 माह पहले जिले की आंगनबाडिय़ों का विद्युतीकरण कराने के लिये राशि बिजली विभाग के पास जमा करा दी गई है वहीं बिजली विभाग का तर्क है कि हमारे पास जब तक हर आंगनबाड़ी केन्द्र से ऑनलाईन आवेदन नहीं आयेंगे तब तक विद्युत कनेक्शन नहीं किये जा सकते। लापरवाही चाहे बिजली विभाग की हो या महिला बाल विकास विभाग की लेकिन इस लापरवाही का खामियाजा शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की आंगनबाडिय़ों में आने वाले नौनिहालो, गर्भवती माताओं, शिशुवती माताओं, टीकाकरण कराने आने वाले बच्चों और उनकी माताओं सहित हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भुगतना पड़ रहा है। इस भीषण गर्मी के दौर में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर करीब 6 घंटे तक बैठकर अपनी ड्यूटी पूरी करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की हालत का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं शहर के बीचों बीच मकरोनिया नगर पालिका के सामने स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र में भी वर्षो से बिजली कनेक्शन नहीं हैं।
मकरोनिया में करीब 3 से 4 ऐसे केन्द्र हैं जहां बिजली विहीन केन्द्र में बैठकर आंगनबाड़ी के सारे काम संचालित हो रहे हैं। बगल में ही ग्रामीण परियोजना का ऑफिस संचालित है और ऐसा नहीं है कि किसी अधिकारी को इस समस्या के बारे में पता न हो लेकिन मुख्यमंत्री की लाड़ली बहना योजना को संचालित करने वाले विभाग की लाड़ली बहने ही गर्मी और पसीने से तरबतर होकर सरकार के दिये हुए दायित्वों को निभाने में लगी हुई है। अब देखना यह है कि अब कब तक यह आंगनबाड़ी केन्द्र विद्युत की रोशनी से रोशन होते हैं या फिर अंधेरे में रहकर ही यहां काम करने वाले कर्मियों और आने वाले हितग्राहियों को पसीना पसीना होते हुए अपना काम करना पड़ता है।
